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Singhi Therapy
सिंघी थेरेपी (Singhi Therapy), जिसे आधुनिक चिकित्सा में कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) या युनानी/आयुर्वेद की भाषा में हिजामा (Hijama) भी कहा जाता है, एक प्राचीन रक्तशोधन तकनीक है। इसमें त्वचा पर वैक्यूम (सक्शन) बनाकर अशुद्ध रक्त (Impure Blood) और टॉक्सिन्स को बाहर निकाला जाता है।
पारंपरिक रूप से इसमें गाय के सींग (Horn) का उपयोग किया जाता था, इसलिए इसे "सिंघी" कहा गया। वर्तमान में इसकी जगह कांच, प्लास्टिक या सिलिकॉन कप्स ने ले ली है।
प्रकार
- ड्राई कपिंग (Dry Cupping): इसमें बिना किसी चीरे के त्वचा पर केवल कप लगाकर वैक्यूम बनाया जाता है, जिससे रक्त संचार बढ़ता है।
- वेट कपिंग (Wet Cupping / हिजामा): इसमें कप लगाने के बाद त्वचा पर हल्के छोटे-छोटे कट या पंक्चर किए जाते हैं और दोबारा वैक्यूम बनाकर दूषित या जमा हुआ खून बाहर निकाला जाता है।
प्रक्रिया (यह काम कैसे करती है?)
- प्रभावित अंग (जैसे पीठ, कंधे या गर्दन) को साफ करके वहां कप रखे जाते हैं।
- कप के अंदर का हवा का दबाव कम करके (सक्शन गन या वैक्यूम से) त्वचा को ऊपर की ओर खींचा जाता है।
- इससे उस हिस्से में तेजी से रक्त संचार (Blood Circulation) होता है और मांसपेशियों की जकड़न खुलती है।
- वेट कपिंग में सूक्ष्म कट लगाकर अशुद्ध रक्त निकाला जाता है।
मुख्य लाभ
- दर्द से राहत सर्वाइकल, कमर दर्द, साइटिका और जोड़ों के दर्द में तुरंत आराम।
- रक्त संचारजमे हुए रक्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर बॉडी डिटॉक्स होती है।
- त्वचा रोगकील-मुंहासे, एग्जिमा और दाद में फायदेमंद।
- मानसिक तनावमांसपेशियों का खिंचाव कम करके माइग्रेन और स्ट्रेस से राहत।